छत्तीसगढ़

नक्सल संगठन में बड़ा बदलाव: देवजी बने CPI माओवादी के नए महासचिव

Shantanu Roy
10 Sept 2025 9:17 PM IST
नक्सल संगठन में बड़ा बदलाव: देवजी बने CPI माओवादी के नए महासचिव
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छग
Jagdalpur. जगदलपुर। नक्सल आंदोलन की जड़ें 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से जुड़ी थीं। यह आंदोलन खेतिहर मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई के रूप में शुरू हुआ था। चारु मजूमदार और कन्हाई चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में शुरू हुआ यह संघर्ष धीरे-धीरे हथियारबंद आंदोलन में बदल गया। समय के साथ विभिन्न नक्सली गुटों ने एकजुट होकर 2004 में CPI माओवादी का गठन किया और संगठन को एक मजबूत ढांचा मिला। अब संगठन में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है, जिससे सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं।

गणपति और बसवराजु जैसे पूर्व महासचिवों के बाद अब तेलंगाना के करीमनगर निवासी देवजी को संगठन का नया महासचिव चुना गया है। बसवराजु की मौत के बाद पोलित ब्यूरो ने सर्वसम्मति से देवजी को यह जिम्मेदारी सौंपी। बताया जा रहा है कि देवजी नक्सलियों के सैन्य विंग का प्रमुख चेहरा हैं और उनका नाम ताड़मेटला कांड से जुड़ा है, जिसमें 2010 में 76 जवान शहीद हुए थे। नक्सली कमलेश के सरेंडर करने के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि पोलित ब्यूरो के छह वरिष्ठ सदस्यों ने देवजी को नया महासचिव मान लिया है।

पोलित ब्यूरो के प्रमुख सदस्य इस प्रकार हैं:
गणपति – पूर्व महासचिव
बसवराजु – पूर्व महासचिव, अबूझमाड़ मुठभेड़ में मारे गए
देवजी – नया महासचिव, करीमनगर, तेलंगाना
मल्ला राजी रेड्डी – तेलंगाना
अभय – केंद्रीय प्रवक्ता, तेलंगाना
मिसिर मिश्रा – झारखंड
ध्यान देने वाली बात यह है कि छह में से चार सदस्य तेलंगाना के करीमनगर इलाके से हैं। यह दक्षिण भारत में नक्सलियों की बढ़ती पकड़ और मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क का संकेत है। सुरक्षा एजेंसियाँ मान रही हैं कि दक्षिण भारत से भर्ती और हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

दंडकारण्य क्षेत्र में हिड़मा की भूमिका
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय कुख्यात नक्सली हिड़मा को दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात सामने आई है। हिड़मा कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है, हालांकि नक्सलियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बदलाव को गंभीरता से देख रही हैं क्योंकि दंडकारण्य क्षेत्र नक्सल गतिविधियों का मुख्य केंद्र है।

नई रणनीति: हथियार और भर्ती पर जोर
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि देवजी के नेतृत्व में संगठन अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करेगा। बीते दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार जब्त किए हैं, जिससे संगठन की ताकत कमजोर हुई है। अब संगठन की नई रणनीति हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने और नए कैडरों की भर्ती तेज करने पर केंद्रित होगी। इससे संगठन भविष्य में फिर से बड़े हमले कर सकता है।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
दक्षिण भारत में करीमनगर से बढ़ती सक्रियता और छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में मजबूत नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एजेंसियाँ नक्सलियों की आपूर्ति श्रृंखला, भर्ती नेटवर्क और वित्तीय मदद के स्रोतों पर विशेष नजर रख रही हैं। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने समन्वय कर निगरानी बढ़ा दी है ताकि संगठन की गतिविधियों पर नियंत्रण पाया जा सके।
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